भाईंदर : मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की 13 अगस्त को होने वाली महासभा में एक ऐसा प्रस्ताव सामने आने वाला है, जिसने शहर की सियासत गरमा दी है. भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रशासकीय कार्यकाल में विकसित की गई मनपा की विभिन्न संपत्तियों और आरक्षित भूखंडों की पट्टिकाओं पर लगी मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें हटाने की तैयारी है. प्रस्ताव में किसी नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन निशाना प्रशासकीय काल में लगाई गई मंत्री प्रताप सरनाईक और तत्कालीन नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे की तस्वीरों पर माना जा रहा है. प्रस्ताव में कहा गया है कि मनपा की ओर से निर्मित सार्वजनिक संपत्तियों और विकसित आरक्षित भूखंडों पर पहले मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों के फोटो लगाने की परंपरा नहीं रही है. प्रशासकीय शासनकाल में पहली बार प्रशासनिक नियमों और राजशिष्टाचार की अनदेखी करते हुए नामफलक पर तस्वीरें लगाई गईं. अब इन तस्वीरों को सम्मानपूर्वक हटाकर मनपा के मूल एवं अधिकृत नामफलक रखने की मांग की गई है.
विकास के श्रेय की पुरानी जंग को हवा
राजनीतिक जानकार इसे महज प्रशासनिक प्रोटोकॉल का मामला नहीं मान रहे हैं. मीरा-भाईंदर में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के बीच विकास कार्यों के श्रेय को लेकर लंबे समय से राजनीतिक खींचतान रही है. प्रशासकीय काल में सरनाईक के प्रभाव से विकसित परियोजनाओं पर उनकी और शिंदे की तस्वीरें लगी होना भाजपा के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में असहजता का कारण माना जाता रहा है. 13 अगस्त को प्रस्ताव महासभा के पटल पर आते ही हंगामे के आसार हैं।