
मीरा- भाईंदर मनपा (एमबीएमसी) और मीरा- भाईंदर, वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस आयुक्तालय के बीच करोड़ों रुपये के बकाया किराए और पुलिस सुरक्षा शुल्क को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। मनपा ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई, चुनाव और अन्य मनपा कार्यों के दौरान पुलिस सुरक्षा के नाम पर मांगे गए 5 करोड़ 20 लाख 66 हजार 911 रुपये का भुगतान नहीं किया जाएगा। साथ ही पुलिस विभाग से मनपा की संपत्तियों का बकाया किराया तत्काल जमा कराने की मांग की गई है।
सुरक्षा देना पुलिस का कानूनी दायित्व, शुल्क नहीं देगी मनपा
मनपा ने पत्र में महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 483 का हवाला देते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा मनपा की वैधानिक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराना पुलिस विभाग का कानूनी दायित्व है। उच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के अनुसार अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई के समय स्थानीय पुलिस को तत्काल और पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराना अनिवार्य है, इसलिए पुलिस सुरक्षा के लिए अलग से कोई शुल्क देय नहीं है। किराए से समायोजन का प्रस्ताव किया खारिज
मनपा ने पुलिस मुख्यालय, पुलिस उपायुक्त कार्यालय, काशीगांव और नयानगर पुलिस स्टेशन तथा यातायात शाखा के लिए अपनी इमारतें और भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराई है। पुलिस आयुक्तालय ने अक्टूबर 2020 से फरवरी 2026 तक की अवधि के लिए सुरक्षा व्यवस्था के एवज में 5.21 करोड़ रुपये की मांग करते हुए इसे देय किराए से समायोजित करने का अनुरोध किया था। मनपा प्रशासन ने इस प्रस्ताव को कानूनी आधार पर अस्वीकार कर दिया। पुलिस पर करोड़ों रुपये का किराया बकाया मनपा प्रशासन के अनुसार, मीरा रोड स्थित यातायात शाखा के लिए आरक्षित भूखंडों का 6 करोड़ 96 हजार 7 रुपये किराया अब तक अदा नहीं किया गया है। वहीं पुलिस आयुक्त कार्यालय, उपायुक्त कार्यालय, काशीगांव और नयानगर पुलिस स्टेशन का कुल किराया 7 करोड़ 24 लाख 94 हजार 727 रुपये है। इसमें से पुलिस विभाग 3 करोड़ 89 लाख 58 हजार 456 रुपये का भुगतान कर चुका है, जबकि 3 करोड़ 35 लाख 36 हजार 271 रुपये अभी भी बकाया हैं। मार्च तक के समायोजन के बाद भी 1 करोड़ 85 लाख 30 हजार 640 रुपये की राशि शेष बताई गई है।अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को भेजा पत्र मनपा प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को भेजे पत्र में बकाया किराया शीघ्र जमा कराने की मांग की है। वहीं पुलिस आयुक्तालय ने शेष राशि अपने कार्यालय के नाम जमा कराने का आग्रह किया है। करोड़ों रुपये के इस वित्तीय विवाद ने मनपा और पुलिस विभाग के बीच प्रशासनिक टकराव को नई चर्चा दे दी है।