मौसम विभाग के अनुसार यूरोप महाद्वीप के कई हिस्सों में हीट डोम बना हुआ है, जिससे भीषण गर्मी पड़ रही है। सूरज की गर्मी हर दिन इसमें वृद्धि करती है। नतीजतन, बारिश और ठंडी हवाएं भी राहत नहीं दे पातीं।
ग्लोबल वार्मिंग ने दुनियाभर में कहर ढाना शुरू कर दिया है। इसके कारण जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर हो गई है। अब तापमान वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी गति से बढ़ रहा है। इसके चलते लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
यूरोप की भीषण गर्मी इस बात की चेतावनी है। यूरोप की इस गर्मी को ‘हीट डोम’ कहें, ‘हीटवेव’ कहें या फिर उसे ‘ओमेगा हीटवेव’ की संज्ञा दी जाए, हकीकत यह है कि यूरोप भीषण गर्मी के साये में झुलस रहा है। यूरोप के कई देश 1970 के दशक की तुलना में दो महीने अधिक ‘हीट स्ट्रेस’ का भीषण असर झेल रहे हैं। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग और जीवाश्म ईंधन जिम्मेदार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार यूरोप महाद्वीप के कई हिस्सों में हीट डोम
बना हुआ है, जिससे भीषण गर्मी पड़ रही है। सूरज की गर्मी हर दिन इसमें वृद्धि करती है। नतीजतन, बारिश और ठंडी हवाएं भी राहत नहीं दे पातीं। हीट डोम बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ते हैं। इससे लोग लंबे समय तक गर्मी झेलने को मजबूर होते हैं। इस समय फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली की सरकारों ने रेड अलर्ट जारी किया हुआ है। पूरे स्पेन में गर्मी का अलर्ट है। बेल्जियम और नीदरलैंड में भीषण गर्मी के चलते अभी तक 3700 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। स्थानीय अधिकारियों की मानें तो आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। फ्रांस के अधिकांश हिस्सों में हाई अलर्ट है। वहां के 54 विभागों में रेड अलर्ट है। यहां 1947 के बाद इस बार भीषण गर्मी देखी गई है।
हालात इतने खराब हैं कि गर्मी से राहत पाने की कोशिश में वहां जलाशयों व नदियों में गए तकरीबन 40 से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत
हो चुकी है। एफिल टावर के पास ट्रोकाडेरो फाउंटेन में गर्मी से राहत पाने के लिए लोग कूदते देखे गए हैं। यही नहीं, वहां घरों में रहने वाले 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की मौतों की
तादाद सबसे ज्यादा, यानी 91 फीसदी है। बेल्जियम और नीदरलैंड में भी सबसे ज्यादा 85 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की मौतें हुई हैं। यह हालात की भयावहता का जीता-जागता सबूत है। इन हालातों ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को बढ़ा दिया है। परिवहन सुविधाओं पर भी काफी दबाव पड़ा है। लोग मानने लगे हैं कि अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को गंभीरता से लेने का समय आ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप में गर्मी
के रिकॉर्ड टूट सकते हैं। वैज्ञानिक इसे ‘ओमेगा ब्लॉक’ नामक दुर्लभ मौसमी पैटर्न की संज्ञा दे रहे हैं। उनके अनुसार ओमेगा ब्लॉक के चलते यूरोप के कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्कूल बंद करने पड़े हैं। बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है और पोल्ट्री फार्मों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस असामान्य गर्मी के पीछे ‘ओमेगा ब्लॉक’ नामक मौसमी पैटर्न है, जिसमें उच्च दबाव का क्षेत्र ग्रीक अक्षर ‘ओमेगा’ के आकार का बन जाता है। यह गर्म हवा को लंबे समय तक एक ही इलाके में रोककर रखता
है, जिससे अमूमन तापमान सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है।
फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी शहर पिसोस में तापमान 44.3 डिग्री
सेल्सियस को पार कर गया है।
उत्तर-पश्चिमी शहर ब्रिटनी में बिजली आपूर्ति ठप रही है। वहीं, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को भी उत्पादन में सात फीसदी की कटौती करने को बाध्य होना पड़ा है। इसका कारण शीतलन के लिए वहां पर्याप्त पानी का अभाव था। इससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ा है।
वहीं, इटली में सोलह शहरों में उच्च स्तर का हाई अलर्ट जारी करना पड़ा है। ब्रिटेन में बढ़ते तापमान के कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा। फ्रांस में कारों में अत्यधिक तापमान के कारण कई छोटे बच्चे मौत के मुंह में चले गए। यहां के ब्रिटनी और पेज दे ला लोआर इलाके के अनेक पोल्ट्री फार्मों में अत्यधिक गर्मी से लाखों पक्षियों की मौत हो गई।
दरअसल, अध्ययनों ने एक साल पहले ही चेता दिया था कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण तीन गुना अधिक भीषण गर्मी पड़ने की आशंका है। नेचर रिव्यू अर्थ एंड एनवायरमेंट में प्रकाशित किंग्स कॉलेज के अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार, स्वस्थ और युवा वयस्कों को बढ़ती गर्मी के चलते होने वाली कठिनाई की सीमा तीन गुना होने की संभावना व्यक्त की गई थी। अध्ययनकर्ताओं ने चेतावनी दी थी कि जिन क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी जैसे हालात होंगे, वहां वृद्ध लोगों को गर्मी से 35 फीसदी अधिक खतरा होगा। अध्ययनकर्ता प्रोफेसर टॉम मैथ्यूज के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि निर्धारित मानक के अनुपात में दो डिग्री तक पहुंच जाती है तो इसके घातक परिणाम होंगे। इससे वृद्ध लोगों को झुलसाने वाली गर्मी की सीमाएं बढ़ेंगी। वहीं, इससे युवा आने वाले समय में अधिक जूझते नजर आएंगे।
शोधकर्ताओं का दावा है कि असहनीय गर्मी में शरीर का मुख्य तापमान छह घंटे के भीतर 47 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। यह