भाईंदर : गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव और सभी धार्मिक-सामाजिक जुलूसों में निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक डीजे, साउंड सिस्टम, ढोल-ताशा और लेजर लाइट के इस्तेमाल पर तत्काल नियंत्रण की मांग की गई है. जिद्दी मराठा प्रतिष्ठान के प्रदीप दिलीप जंगम ने पुलिस आयुक्त, मनपा आयुक्त और महाराष्ट्र प्रदूषणा नियंत्रण मंडल को निवेदन सौंपकर स्वतंत्र परिपत्र जारी करने की मांग की है. निवेदन में सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण मामले (2005) और बॉम्बे हाई कोर्ट के 16 अगस्त 2016 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि उत्सव मंडलों को अनुमति देने से पहले ध्वनि नियंत्रण संबंधी नियमों की लिखित जानकारी दी जाए और पूर्व में नियम तोड़ने वाले मंडलों के रिकॉर्ड की जांच की जाए. जंगम ने मांग की है कि बड़े मंडलों और जुलूसों में साउंड लेवल मीटर से डेसिबल मॉनिटरिंग अचानक जांच और उल्लंघन की डिजिटल रिकॉर्डिंग की जाए. ढोल-ताशा पथकों की संख्या, जुलूस का समय और मार्ग भी अनुमति में स्पष्ट किया जाए. सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील या आपत्तिजनक गाने, तेज लेजर लाइट से नागरिकों व वाहन चालकों की आंखों को होने वाले खतरे तथा अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष ध्वनि नियंत्रण की मांग की गई है. उत्सव अवधि में 24 घंटे ध्वनि प्रदूषण हेल्पलाइन, प्रत्येक शिकायत को नंबर देने और कार्रवाई का रिकॉर्ड रखने की भी मांग की गई है. सभी धर्मों के सामाजिक आयोजनों पर नियम समान रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है.