बच्चों की डिजिटल सुरक्षा…सरकार बैठकों, अध्ययन

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में उलझी सोशल मीडिया रिपोर्ट छह महीने और टली

मुंबई : बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए गठित महाराष्ट्र सरकार की कार्यबल समिति को छह महीने का अतिरिक्त समय दिए जाने से सरकार की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। समिति को मूल रूप से तीन महीने में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन अब नीति निर्माण और आगे टल गया है।

राज्य में १८ वर्ष से कम आयु के लगभग चार करोड़ बच्चे हैं। समिति को सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक प्रभाव, साइबर बुलिंग, डिजिटल विज्ञापन, व्यवहार में बदलाव और सामाजिक कौशल पर असर का अध्ययन करना है। आयु सत्यापन, स्क्रीन टाइम सीमा और स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा शिक्षा जैसे उपाय भी इसके दायरे में हैं। सवाल यह है कि जब समस्या पहले से पहचानी जा चुकी है, तब सरकार रिपोर्ट के इंतजार में हाथ पर हाथ रखकर क्यों बैठी है?

सरकार रिपोर्ट आने तक भी अंतरिम दिशा-निर्देश जारी कर सकती थी। स्कूलोेंं में स्क्रीन टाइम नीति, साइबर बुलिंग शिकायत तंत्र, अभिभावक प्रशिक्षण, आयु-उपयुक्त कंटेंट नियंत्रण और सोशल मीडिया कंपनियों से जवाबदेही तुरंत तय की जा सकती है। समिति का गठन तभी सार्थक होगा, जब उसकी सिफारिशें समयबद्ध हों और उन पर कार्रवाई हो। अन्यथा बच्चों की डिजिटल सुरक्षा केवल बैठकों, अध्ययन और बढ़ाई गई समय सीमाओं में उलझकर रह जाएगी।

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