
12 साल के इंतजार के बाद शुरू हुआ था जूनियर कोर्ट
भाईंदर: शहर में लंबे समय से चली आ रही न्यायालयों की मांग अब पूरी होने की दिशा में बढ़ गई है. मीरा-भाईंदर में एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय तथा एक वरिष्ठ सिविल न्यायालय शुरू करने को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है. ठाणे जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को इसकी पुष्टि की. नए न्यायालय शुरू होने से नागरिकों को उच्च स्तरीय दीवानी और फौजदारी मामलों की सुनवाई के लिए ठाणे के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. मीरा-भयंदर में पुलिस थाने, यातायात पुलिस, तलाठी, तहसील और उप-पंजीयक सहित कई सरकारी कार्यालय हैं. इन कार्यालयों से संबंधित मामलों, दावों और दर्ज अपराधों की सुनवाई के लिए ठाणे जाना नागरिकों के लिए लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ था. वहीं, ठाणे जिला न्यायालय पर बढ़ते मामलों के बोझ के कारण सुनवाई और निपटारे में भी देरी हो रही थी.
शहर में अलग-अलग स्तर की दीवानी और आपराधिक अदालतों की मांग लंबे समय से की जा रही थी. 19 मार्च 2013 को राज्य सरकार ने मीरा रोड पूर्व में बस स्टॉप क्रमांक 15 के पास घोडबंदर गाँव के सर्वे क्रमांक 233 के भूखंड पर (4353.57 वर्ग मीटर क्षेत्रफल) स्वतंत्र न्यायालय की इमारत बनाने की मंजूरी दी थी. करीब 12 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद 8 मार्च 2025 को राज्य के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में, सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायमूर्ति अभय ओक के हाथों न्यायालय का उद्घाटन संपन्न हुआ था और कनिष्ठ सिविल न्यायालय का कामकाज शुरू हुआ था. अब उच्च स्तर के मामलों के लिए भी स्थानीय स्तर पर न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हो गया है.
मौजूदा भवन में ही शुरू
हो सकता है कामकाज
मीरा-भाईंदर बार एसोसिएशन ने इस मांग को लेकर ठाणे न्यायालय से संपर्क किया था. शहर में लंबित मामलों की संख्या और नागरिकों की परेशानी को देखते हुए उच्च न्यायालय की ‘नई न्यायालय स्थापना समिति’ ने कनिष्ठ सिविल न्यायालय परिसर में ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय और वरिष्ठ सिविल न्यायालय स्थापित करने को सैद्धांतिक अनुमति दी है. न्यायालय भवन और न्यायाधीशों के आवासीय क्वार्टर की शर्तों में विशेष छूट देते हुए यह मंजूरी दी गई है. मीरा-भाईंदर एडवोकेट्स एसोसिएशन के सचिव प्रवीण पाटिल के अनुसार, वर्तमान न्यायालय भवन में पर्याप्त जगह उपलब्ध है.