
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के दैनिक सफाई और कचरा परिवहन के ठेके को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सफाई ठेकेदार ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट सेल प्राइवेट लिमिटेड को किए जा रहे भुगतानों के बीच अनुबंध में अनिवार्य बताई गई वीटीएमएस, जीपीएस, एमआईएस और बायोमेट्रिक, फेस रीडिंग जैसी सत्यापन प्रणालियों के प्रभावी रूप से चालू नहीं होने का मामला सामने आया है। मनपा के सदन नेता एड. रवि व्यास ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच तथा विशेष वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट की मांग की है।
एड. रवि व्यास ने मनपा प्रशासन के ही पत्राचार का हवाला देते हुए कहा है कि ठेकेदार के काम के तकनीकी सत्यापन के लिए आवश्यक कुछ प्रणालियां प्रभावी रूप से चालू नहीं थीं। ऐसे में वाहनों की वास्तविक तैनाती, उनके रूट और संचालन, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति तथा किए गए कार्य की मात्रा का निष्पक्ष सत्यापन किस आधार पर किया गया। यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
रवि व्यास ने सवाल उठाया कि यदि वीटीएमएस, जीपीएस, एमआईएस और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे, तो संबंधित अवधि के बिलों को प्रमाणित करने, भुगतान की सिफारिश करने, मंजूरी देने तथा उनका ऑडिट करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित ठेकेदारों और मनपा प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है।
मीरा-भाईंदर शहर की दैनिक सफाई और कचरा परिवहन का ठेका दो जोन में बांटकर दो कंपनिय को पांच वर्षों के लिए दिया गया है।
जोन-1 में प्रभाग समिति क्रमांक 1, 2 और 3 शामिल हैं, जिसका ठेका मे। ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट का जुलाई 2023 में दिया गया। वहीं जोन-2 में प्रभाग समिति क्रमांक 4, 5 और 6 का ठेका मे। कोणाव इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को मार्च 2023 में दिया गया।
व्यास के अनुसार, वर्ष 2012 में प्रतिदिन करीब 450 टन कचरे की सफाई और परिवहन के लिए वार्षिक निविदा राशि लगभग 39 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2023 तक बढ़कर करीब 90 करोड़ रुपय हो गई। उनका आरोप है कि वर्ष 2023 की नई निविदा में यह राशि बढ़ाकर करीब 150 करोड़ रुपम सालाना कर दी गई।
खास बात यह है कि पहले ठेका कंपनी को ही वाहन उपलब्ध कराने होते थे, जबकि नए ठेके में वाहन मनपा द्वारा खरीदकर उपलब्ध कराए गए हैं।
मीरा-भाईंदर मनपा में सदन नेता एड. रवि व्यास का कहना है कि मुद्दा केवल ठेकेदार का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और उसकी निगरानी की पूरी व्यवस्था का है। यदि अनुबंध में अनिवार्य सत्यापन प्रणाली चालू नहीं थी, तो फिर करोड़ों रुपये के भुगतान किस दस्तावेज और किस तकनीकी प्रमाण के आधार पर किए गए, इसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। दोषी ठेकेदार या अधिकारी कोई भी हो, उसकी जवाबदेही तय कर सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
व्यास ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 के ठेके में सफाई कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के तहत प्रतिदिन 1,033 रुपये के बजाय 1,399 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। उनके अनुसार करीब 1,800 सफाई कर्मचारियों के हिसाब से प्रति कर्मचारी, 366 रुपये अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है, जिससे पांच वर्षों में ठेकेदारों को करीब 120.23 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान होने का अनुमान है।
इसी तरह, उनके अनुसार पहले के ठेके में करीब 3 टन क्षमता वाले कचरा वाहन के लिए प्रतिदिन 7,826 रुपये का भुगतान किया जाता था, जबकि नए ठेके में इसी श्रेणी के वाहन के लिए करीब 13,200 रुपये प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है। इस बारे में व्यास का दावा है कि इससे पांच वर्षों में करीब 181.44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय देनदारी बनती है।