मीरा-भायंदर शहर में विकास या विनाश !

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मीरा-भायंदर । मीरा-भायंदर शहर में एक तरफ जहां आम नागरिक पीने के पानी की भारी किल्लत, टूटी सड़कों और सीवरेज जैसी समस्याओं से दिन-रात जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मीरा-भायंदर महानगरपालिका का नगर रचना विभाग आंखें मूंदकर सैकड़ों नए बड़े प्रोजेक्ट्स को धड़ाधड़ मंजूरी देने में लगा है। तो सीधा सवाल उठता है कि इन नए प्रोजेक्ट्स में आने वाले हजारों परिवारों के लिए पानी और अन्य सुविधाएं कहां से आएंगी? सहायक संचालक (नगर रचना विभाग) कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पिछले करीब २० वर्षों में २०,००० वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाले ७१ रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को अनुमति दी गई है। इनमें से कुछ विशालकाय प्रोजेक्ट्स २ से ५ लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में पैâले हुए हैं।

ज्ञात हो कि २०,००० वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र वाले किसी भी प्रोजेक्ट को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, १९८६ के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पर्यावरण मंजूरी (एनवायरमेंट क्लीयरेंस) मिलना अनिवार्य है। शहर में मल निकासी, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं की उचित व्यवस्था नहीं है, लेकिन इसके बावजूद नई इमारतों के निर्माण को धड़ाधड़ मंजूरियां (परमिशन) दी जा रही हैं। इस अनियोजित विकास, अंधाधुंध कंक्रीटीकरण के कारण आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में सड़कों और सीवरेज लाइनों की क्षमता कम होने के बावजूद बड़ी इमारतें खड़ी की जा रही हैं।

मीरा-भायंदर में १४ लाख आबादी के लिए रोजाना २४० एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन सप्लाई महज १९५ एमएलडी है। यानी ४५ एमएलडी का भारी अंतर। इसके बावजूद मनपा नए प्रोजेक्ट्स को कमेंसमेंट सर्टिफिकेट बांट रही है। सवाल है कि जब मौजूदा आबादी प्यासी है, तो हजारों नए परिवारों को पानी कहां से मिलेगा?

मीरा-भायंदर शहर में बुनियादी सुविधाओं के बिना धड़ाधड़ दी जा रही बिल्डिंग परमिशन के पीछे एक बहुत बड़े आर्थिक घोटाले की संभावना जताई जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों द्वारा लगातार गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि सत्ताधारी दल के नेता प्रति स्क्वायर फुट निर्माण की अनुमति देने के बदले तय रेट कार्ड के अनुसार मोटी रिश्वत वसूल रहे हैं। इस रिश्वत की वसूली बिल्डर अंतत: आम खरीदार से ही फ्लैट की कीमत बढ़ाकर करते हैं।

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