
मीरा भाईंदर मनपा में विरासत अधिकार के तहत नियुक्त किए गए सफाई कर्मचारियों के शिक्षित वारिसों को अब केवल सफाई कार्य करने के निर्देश दिए जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थिति ऐसी बन गई है कि एमबीए जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त कर्मचारी भी शौचालय साफ करने को मजबूर हो रहे हैं। मनपा की आम सभा में पारित एक फैसले के बाद प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सफाईकर्मी पद पर नियुक्त कर्मचारियों से केवल सफाई कार्य ही कराया जाएगा।
दरअसल, राज्य सरकार की नीति के तहत चौथे दर्जे के सफाई कर्मचारियों के वारिसों को मनपा सेवा में शामिल किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों के परिवारों को रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सम्मान देना है। इसके तहत कर्मचारियों की पत्नी, बेटे, बहू या नामित परिजनों को नौकरी में अवसर दिया जाता है।
विरासत भर्ती में गड़बड़ी के आरोप अब तक मनपा प्रशासन इन उत्तराधिकारियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग-अलग विभागों में नियुक्त करता रहा था। लेकिन हाल के दिनों में विरासत अधिकार भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने लगीं। यह मुद्दा हाल ही में हुई महासभा में जोरदार तरीके से उठा, जहां सत्ताधारी भाजपा ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों का मामला उठाते हुए विस्तृत जांच की मांग की।
महासभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस मामले की पूरी जानकारी अगली बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। तब तक सफाईकर्मी पद पर नियुक्त कर्मचारियों से केवल सफाई कार्य ही कराया जाए। इतना ही नहीं, सफाई के अतिरिक्त अन्य कार्य कर रहे कर्मचारियों का वेतन मई महीने से रोकने का भी फैसला लिया गया है।
योग्यता अलग-काम सफाई का इस निर्णय से विरासत अधिकार के तहत नौकरी पाने वाले कई शिक्षित कर्मचारियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। निजी क्षेत्र में सीमित अवसर और आर्थिक मजबूरियों के चलते कई लोगों ने मनपा की नौकरी स्वीकार की थी। अब उन्हें उनकी योग्यता से अलग सफाई और शौचालय सफाई जैसे कार्य करने पड़ रहे हैं।
MBMC जन स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त सचिन बांगर ने कहा कि हाल । ही में महासभा ने विरासत में मिले मनपा र्मचारियों के संबंध में आदेश जारी कए हैं। संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति फाईकर्मी के रूप में हुई है, इसलिए उन्हें वल सफाई कार्य करने के निर्देश दिए एहैं।