राजस्व विभाग ने भेजे सैकड़ों नोटिस, कार्रवाई शून्य सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का ‘ब्लैक होल’ उजागर !

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भायंदर : पारदर्शी सुशासन और अवैध निर्माणकार्यों के मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का ढिंढोरा पीटने वाली महायुति सरकार की जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के कई जिलों से जुड़े राजस्व विभाग कथित रूप से भ्रष्टाचार के ‘ब्लैक हो ल’ बन चुके हैं। ताजा मामला ठाणे जिला के अंतर्गत आने वाले मीरा-भायंदर शहर का है जहां के राजस्व विभाग के अपर तहसीलदार ने पिछले करीब दो सालों में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा और निर्माणकार्य करने वाले सैकड़ों लोगों को महाराष्ट्र जमीन महसूल अधिनियम १९६६ की धारा ५० (३) के तहत नोटिस जारी की। यह धारा सरकारी (शासकीय) भूमि पर अनधिकृत कब्जे या अतिक्रमण को हटाने और दंडित करने से संबंधित है। सूचना के अधिकार के माध्यम से इस मामले को उजागार करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एड. कृष्णा गुप्ता का आरोप है कि अपर तहसीलदार निलेश गोंड ने पहले तो एक ही मिलते जुलते क्रमांक वाले कई नोटिस अलग अलग उल्लंघनकर्ताओं को जारी किए। सैकड़ों की संख्या में नोटिस जारी करने के बावजूद कार्यवाई के नाम पर केवल कुछ अवैध निर्माणकार्यों को तोड़ा गया, जिसके कारण इस मामले में भ्रष्टाचार होने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। आरोपों को बेबुनियाद और निराधार करार देते हुए अपर तहसीलदार निलेश गोंड ने दावा किया है कि जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए लगभग सभी के अवैध निर्माणकार्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन कुछ मामलों में न्यायालय द्वारा पारित स्टे-ऑर्डर के कारण हमारे हाथ बंधे हुए हैं, कानूनी प्रक्रिया पूरी करके उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा।

कृष्णा गुप्ता ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और अपर तहसीलदार सहित अन्य दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

‘गोंड ने कहा कि हर एक उल्लंघनकर्ता को व्यक्तिगत नोटिस जारी किया गया, लेकिन जहां सामूहिक भूमि या फिर एक सर्वे नंबर है, उन नोटिसों पर समान आउटवर्ड नंबर डाले गए और सभी प्राप्तकर्ताओं के उनके हस्ताक्षर और फोन नंबर मौजूद हैं।’

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