
खाड़ी में ईरान की नाकेबंदी की कवायद के दौरान अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों का मारा जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। जिसको लेकर देश में गम व गुस्सा व्याप्त है। यूं तो कहा जाता रहा है कि भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है और क्वॉड जैसे संगठनों में भूमिका निभा रहा है, तो फिर लगातार भारत के हितों पर कुठाराघात क्यों किया जा रहा है? भले ही अमेरिका ईरान की तेल निर्यात से होने वाली आय रोकने व युद्ध समाप्त करने हेतु समझौते के लिये दबाव बनाने हेतु ये आक्रामक नीति अपना रहा हो। लेकिन जिन देशों का युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है, उनके नागरिकों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? हाल में भारतीय चालक दल वाले तीन टैंकरों को अमेरिकी सेना द्वारा निशाना बनाया गया है। इसमें से, ओमान की खाड़ी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय चालक दल के तीन सदस्य मारे गये हैं। जिससे भारत व अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। वैसे औपचारिक विरोध दर्ज करते हुए भारत ने दिल्ली में एक अमेरिकी राजनयिक को तलब भी किया है। इसके बावजूद भारत के खिलाफ लगातार नकारात्मक रवैया दशनि वाले अमेरिका के खिलाफ सख्त स्टैंड लेने की मांग की जा रही है। इसके बावजूद कि भारत क्वॉड में अमेरिका का साझेदार है। विडंबना यह भी है कि जो सूत्रधार संगठन के जरिये समुद्री आवाजाही को स्वतंत्र बनाने की बात करता है, वही अमेरिका इसमें बाधक बना है। भले ही अमेरिका इन जहाजों के प्रतिबंधित होने की बात कहे, या जहाज भारतीय न हों, लेकिन उनमें चालक दल के सदस्य तो भारतीय थे। इसकी जानकारी स्वाभाविक रूप से अमेरिका के खुफिया तंत्र को जरूर रही होगी। अमेरिका को सार्वजनिक रूप से भारतीय नाविकों के मारे जाने पर खेद जताना चाहिए। निश्चय ही भारत के निकट के समुद्री क्षेत्र में अमेरिका का निरंकुश व्यवहार निंदनीय है। कूटनीतिज्ञ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारत को इस मुद्दे को सख्ती से अमेरिका के सामने उठाना चाहिए था।
तमाम भारतीयों को इस मामले में विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया उदार लगती है। सवाल पूछा जा रहा है कि यदि तीन अमेरिकी नागरिक मारे जाते तो क्या अमेरिका चुप बैठता ? कहा जा रहा है कि भारत का कड़ा विरोध सामने न आने के कारण होर्मुज स्ट्रेट के पास पलाऊ के झंडे वाले टैंकर पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय के मारे जाने की घटना की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कम चर्चा हुई है। विडंबना है कि अमेरिकी सेना ने एक सप्ताह में भारतीय चालक दल वाले तीन टैंकरों को निशाना बनाया। हालांकि, सोमवार को हुए हवाई हमले के बाद ओमानी अधिकारियों ने 24 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया था। दरअसल, ट्रंप प्रशासन की निरंकुशता के चलते ही अमेरिका रवैया वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। आखिर अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में कारोबारी जहाजों को निशाना बनाने का क्या औचित्य है? अमेरिका को यह अधिकार किसने दे दिया कि वह तटस्थ देशों के नागरिकों को निशाना बनाये ? क्यों भारतीय नागरिक अमेरिका व ईरान के बीच जारी संघर्ष की कीमत चुकाएं? इस तरह का शक्ति प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन है तथा स्वतंत्र नौवहन के मार्ग में बाधक है। भारतीयों का गुस्सा तब कम हो जाता यदि अमेरिका मरने वाले नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर देता। सही मायने में अमेरिका भारत को अपने कारोबारी हितों के साधन के रूप में तो इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन भारतीय आत्मसम्मान व संप्रभुता का मान नहीं रखता। भारत को बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप ही अपनी कूटनीति का निर्धारण करना चाहिए। हमें दुनिया को बताना चाहिए कि भारत एक उभरता बाजार ही नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी आबादी वाला दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। दुनिया को संदेश जाना चाहिए कि हम अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमाओं में अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम हैं। अब चाहे सामने अमेरिका हो या चीन जैसे कोई अन्य देश। भले ही अंतर्राष्ट्रीय सीमा में कई जहाज भारत के स्वामित्व वाले न हों, लेकिन चालक दलों में शामिल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हर कीमत पर की जानी चाहिए ।