सन संवाददाता
मीरा-भायंदर । मीरा भाईंदर महानगरपालिका के प्रभाग समिति क्रमांक 6 के कार्यक्षेत्र में अवैध निर्माणों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। अवैध चालों से लेकर बड़े-बड़े व्यावसायिक शेड का निर्माण धड़ल्ले से जारी है । आरोप है कि प्रभाग अधिकारी इन अवैध निर्माणों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाए उन्हें मूक संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। मनपा आयुक्त को गुमराह करने के लिए अवैध निर्माण पर नाम मात्र कार्रवाई दिखाई जाती है और यह दावा किया जाता है कि क्षेत्र में कोई अवैध निर्माण नहीं हो रहा है । सूत्रों के अनुसार, यहाँ प्रति सप्ताह एक-दो कमरों का निर्माण किया जा रहा है। आरोप है कि प्रत्येक रूम के पीछे मनपा अधिकारी 70-80 हजार रुपयों की मोटी रकम वसूल कर रहे हैं, जिसकी आड़ में धीरे-धीरे एक बड़ी चाल खड़ी की जा रही है ।
कई अवैध निर्माण के खिलाफ मनपा में शिकायत दर्ज कराई गई थी। प्रभाग अधिकारी भरत सोनारे ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। प्रभाग अधिकारी की इसी ढीली कार्यप्रणाली के चलते अवैध निर्माणकर्ता को कोर्ट से स्थगनादेश (स्टे) लाने का पूरा मौका मिल गया। महापौर डिंपल मेहता द्वारा शहर को अवैध निर्माणों से मुक्त करने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन प्रभाग अधिकारी भरत सोनारे जैसे अधिकारी खुलेआम इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं।
याद रहे कि, महापौर ने पूर्व में यह आधिकारिक घोषणा की थी कि यदि कोई भी अधिकारी अवैध निर्माणों को संरक्षण देते हुए या बढावा देते हुए पाया जाता है, तो उसे निलंबित करने का प्रस्ताव महानगरपालिका की आमसभा में लाया जाएगा। आगामी आमसभा की बैठक में महापौर अपनी घोषणा के अनुरूप प्रभाग अधिकारी भरत सोनारे के निलंबन का प्रस्ताव पटल पर रखते हैं, या फिर यह जीरो टॉलरेंस की नीति महज एक कागजी दांव बनकर रह जाएगी। पूरे शहर की निगाहें अब आने वाली आमसभा के फैसले पर रहेगी !!