पहले काम, फिर मंजूरी !

भाईंदर : मानसून में पेड़ गिरने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए मीरा भाईंदर मनपा ने 2 अतिरिक्त हाइड्रोलिक बूम लिफ्ट वाहन किराये पर लेकर पेड़ों की छंटाई शुरू कर दी, लेकिन 25 लाख रुपये के इस आपातकालीन खर्च को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. उद्यान विभाग ने 31 जुलाई को हुई स्थायी समिति की बैठक में 25 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा था. विभाग के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भारी बारिश की चेतावनी के बाद 7 जुलाई को महापौर की अध्यक्षता में हुई आपदा प्रबंधन बैठक में अतिरिक्त बूम लिफ्ट वाहन किराये पर लेने का निर्णय लिया गया था. मनपा के पास पहले से 2 हाइड्रोलिक सीढ़ी वाहन हैं, लेकिन पूरे शहर में ऊंचे पेड़ों की समय पर छंटाई के लिए उन्हें पर्याप्त नहीं माना गया. इसलिए आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए निविदा प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना 7 जुलाई से ही 60 और 80 फीट की 2 आर्टिकुलेटिंग बूम लिफ्ट चालक, ऑपरेटर और ईंधन सहित किराये पर लेकर काम शुरू कर दिया गया. दोनों वाहनों पर प्रतिदिन 2 शिफ्टों में करीब 66,080 रुपये खर्च हो रहे. इसके आधार पर 25 लाख रुपये के व्यय को उद्यान विभाग के वर्ष 2026-27 के वाहन खरीद के लिए मंजूर निधि से इस खर्च को मंजूरी देने की सिफारिश की गई.
प्रस्ताव को स्थाई समिति ने दी है मंजूरी
आयुक्त की स्वीकृति के बाद एम. के. इंफ्राटेक को कार्यादेश जारी किया गया और बाद में वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी के लिए प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा गया.
प्रस्ताव को स्थाई समिति ने मंजूरी दे दी. वही एड. कृष्णा गुप्ता और कुछ स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब कार्य 7 जुलाई से शुरू हो चुका था तो स्थायी समिति से बाद में मंजूरी लेने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है. साथ ही 25 लाख रुपये के आपातकालीन खर्च, बिना निविदा प्रक्रिया और ठेकेदार के चयन को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
जबकि मनपा प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत नागरिकों की सुरक्षा और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आपातकालीन परिस्थितियों में लिया गया है.