बिना EC कचरा प्रबंधन को माना नियमों का उल्लंघन, जल्द पर्यावरण मंजूरी लेने का निर्देशउत्तन पाली गांव डंपिंग ग्राउंड पर NGT की सख्तीपुराने कचरे के निपटारे के लिए 3 महीने की मोहलत

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मीरा भाईंदर, (सं.) भाईंदर पश्चिम उत्तन-पाली गांव स्थित डंपिंग ग्राउंड को लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने मीरा-भाईंदर महानगरपालिका को बड़ा झटका देते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. एनजीटी ने माना कि इस स्थल पर संचालित कचरा प्रबंधन गतिविधि के लिए पूर्व पर्यावरण मंजूरी (ईसी) आवश्यक थी और बिना मंजूरी के गतिविधि संचालित करना पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है. हालांकि, पर्यावरण हित को ध्यान में रखते हुए तत्काल डंपिंग बंद करने के बजाय एनजीटी ने मनपा को सक्षम प्राधिकारी से जल्द पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने और उसके अंतिम निर्णय का पालन करने का निर्देश दिया है.

रोजाना 500 से 600 मीट्रिक टन कचरा उत्तन-पाली के सर्वे नंबर 25 और 65 पर स्थित इस स्थल पर शहर से प्रतिदिन करीब500 से  600 मीट्रिक टन कचरा पहुंचाया जाता है. इसमें होटल, अस्पताल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा भी शामिल है. स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस स्थल का विरोध करते रहे हैं. उनका कहना है कि डंपिंग ग्राउंड बस्तियों, खेती की जमीन, जलस्त्रोतों और अरब सागर के बेहद करीब स्थित है.

लीचेट से खेत और जलस्रोत प्रभावित होने का आरोप

एनजीटी में दायर आवेदन में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2009 में शुरू किया गया कथित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रकल्प बाद में बिना उचित प्रक्रिया के कचरा डालने वाले डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गया. गीले कचरे से निकलने वाला लीचेट खेतों और जलस्रोतों में पहुंचकर समुद्र तक जाने का आरोप लगाया गया. इससे कृषि भूमि और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ ही स्थानीय लोगों को दुर्गंध की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

जमीन का आरक्षण बदलने पर भी उठे सवाल

मामले में जमीन के आरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए. आरोप के अनुसार, दिसंबर 2002 में जिलाधिकारी ने जमीन मनपा को अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना के लिए दी थी. विकास योजना में जमीन का कुछ हिस्सा पहाड़ी और कुछ हिस्सा नो-डेवलपमेंट जोन में था. आरोप है कि महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया तथा जनता से आपत्ति-सुझाव लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना जमीन का आरक्षण बदला गया.

पुराना कचरा हटाने के लिए 3 महीने

एनजीटी ने मनपा को संबंधित स्थल से पुराना कचरा हटाने के लिए 3 महीने की समयसीमा दी है. साथ ही महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को निर्देश दिया गया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत निर्धारित अवधि में पुराने कचरे का निपटारा नहीं होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना कर मनपा से वसूली जाए.

सैनिटरी लैंडफिल का 80% काम पूरा

आदेश में यह भी दर्ज है कि मनपा और शहरी विकास विभाग के अनुसार प्रस्तावित सैनिटरी लैंडफिल का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था और जून 2025 में इसके संचालन की संभावना जताई गई थी. ऐसे में केवल पुराने कचरे की डंपिंग के लिए पर्यावरणीय मंजूरी से छूट का प्रावधान लागू नहीं माना जा सकता. एनजीटी ने यह भी उल्लेख किया कि मनपा ने बाद में स्वयं पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आवेदन किया था. इससे यह संकेत मिलता है कि मनपा को भी अपनी गतिविधि के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता होने का विश्वास था. एनजीटी ने मनपा जल्द से जल्द सक्षम प्राधिकारी से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करे और उस पर आने वाले अंतिम निर्णय का पूरी तरह पालन करे.

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