चलती बस का निकला पहिया

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 बसों की फिटनेस, सर्विसिंग व सुरक्षा जांच पर सवाल

30 से ज्यादा यात्री  बाल-बाल बचे

मीरा-भाईंदर, (सं.) मीरारोड पूर्व के कनकिया परिसर में रविवार को महानगरपालिका परिवहन उपक्रम की चलती बस का अचानक पहिया निकल जाने से हड़कंप मच गया. घटना के समय बस में 30 से अधिक यात्री सवार बताए जा रहे हैं. गनीमत रही कि पहिया निकलने के बावजूद कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और यात्रियों की जान बच गई. घटना का वीडियो सामने आने के बाद मनपा परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और बसों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. बताया जा रहा है कि बस सड़क पर सामान्य रूप से चल रही थी, तभी अचानक उसका पहिया निकल गया. घटना के बाद बस में सवार यात्रियों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई. हालांकि जानमाल का कोई नुकसान नहीं  हुआ. अब सवाल यह है कि चलती बस का पहिया आखिर कैसे निकल गया और सड़क पर उतारने से पहले बस की तकनीकी जांच किस स्तर पर की गई थी? 10 साल पुरानी बसें दे रहीं जवाब : मनपा परिवहन सेवा की शुरुआत वर्ष 2005 में 50 बसों के साथ हुई थी. आज परिवहन उपक्रम के बेड़े में कुल 131 बसें हैं, जिनमें 74 डीजल और 57 ई-बसें शामिल हैं. इनमें वर्ष 2015-16 में खरीदी गई डीजल बसें अब करीब 10 वर्ष का औसत जीवनकाल पूरा कर चुकी हैं.

18-20 लाख आबादी, जरूरत 350 बसों की, उपलब्ध सिर्फ 131

मीरा-भाईंदर की आबादी वर्तमान में करीब 18 से 20 लाख तक पहुंच चुकी है. शहर में लगातार नए आवासीय प्रकल्प विकसित हो रहे हैं. बड़ी संख्या में नागरिक रोजगार के लिए मुंबई, ठाणे, वसई-विरार और पालघर की ओर प्रतिदिन आवागमन करते हैं.

ऐसे में सार्वजनिक परिवहन शहर की बड़ी जरूरत बन चुका है. वर्तमान आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए शहर को कम से कम 350 बसों की आवश्यकता बताई जा रही है, जबकि मनपा के पास महज 131 बसें हैं. ऊपर से पुराने डीजल बस बेड़े में लगातार खराबियां यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा रही हैं.

‘पहिया निकलने’ के बाद अब जवाबदेही का सवाल

कनकिया की घटना ने परिवहन विभाग के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. बसों की फिटनेस जांच कितनी नियमित होती है? प्रत्येक बस सड़क पर उतारने से पहले उसकी तकनीकी जांच कौन करता है? पहिए और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की सुरक्षा जांच के क्या मानक हैं? पुरानी बसों की समय पर मरम्मत और उनके पुर्जों को बदलने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

दो-तीन वर्षों में कई बसें हो जाएगी अनुपयोगी

इन बसों में लगातार तकनीकी खराबियां सामने आने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आशंका है कि अगले दो-तीन वर्षों में इनमें से कई बसें पूरी तरह अनुपयोगी हो सकती हैं. ऐसे में चलती बस का पहिया निकलने की घटना ने पुराने बस बेड़े के रखरखाव और नियमित फिटनेस जांच की व्यवस्था पर सवाल और गहरा दिए हैं.

मीरा-भाईंदर मनपा की डीजल बस सेवा ठेकेदार के माध्यम से संचालित होती है, जिसमें कर्मचारियों के वेतन, डीजल और बसों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की है. चलती बस का पहिया निकलना मेंटेनेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो ठेकेदार की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता. मुझे विश्वास है कि महापौर डिंपल मेहता, विधायक नरेंद्र मेहता और मनपा आयुक्त इस मामले में तत्काल सख्त निर्णय लेंगे. – एड. राजकुमार मिश्रा, सभापति एमबीएमटी

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