पहले दोस्ती, फिर धमकी; ऑनलाइन स्टॉकिंग और मॉफिंग से दहशत
मुंबई : सोशल मीडिया पर एक हाय, एक फ्रॉड रिक्वेस्ट या एक वीडियो कॉल और फिर शुरू होता है ब्लैकमेलिंग, मॉफिंग और ऑनलाइन आतंक का खतरनाक खेल। मुंबई में महिलाओं को फंसाकर उनकी तस्वीरों और निजी जानकारी के जरिए बदनाम करने वाले साइबर गिरोहों का जाल तेजी से फैल रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सऐप अब सिर्फ बातचीत के मंच नहीं रहे, बल्कि महिलाओं को शिकार बनाने का सबसे बड़ा अड्डा बनते जा रहे हैं।
मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधियों ने महिलाओं को फंसाने के लिए पूरी डिजिटल ट्रैप फैक्ट्री खड़ी कर दी है। पहले फेक प्रोफाइल के जरिए दोस्ती की जाती है, फिर लगातार चैटिंग, इमोशनल बातें और भरोसा जीतने का खेल चलता है। जैसे ही सामने वाला भरोसे में आता है, निजी फोटो और वीडियो हासिल कर लिए जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है असली खेल, मॉर्फिग, धमकी और ब्लैकमेलिंग।
पिछले तीन महीनों में मुंबई में फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल, मॉर्फिग, ई-मेल और मैसेजिंग के जरिए महिलाओं को निशाना बनाने वाले करीब ६० मामले दर्ज हुए हैं। इनमें कई मामलों में आरोपी महिलाओं की तस्वीरों को अश्लील बनाकर वायरल करने की धमकी दे रहे थे। पुलिस ने २८ मामलों का खुलासा कर १* आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी महिलाओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखते हैं। कौन कहां जाती है, किससे मिलती है, परिवार में कौन है, किस तरह की तस्वीरें पोस्ट करती है, हर जानकारी चुपचाप इकट्ठा की जाती है। इसके बाद भावनात्मक जाल बिछाकर उन्हें अकेलेपन, दोस्ती या प्रेम के नाम पर फंसाया जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि जैसे ही महिला बातचीत बंद करती है या आरोपी को नकार देती है, वही दोस्त साइबर शिकारी बन जाता है। फर्जी अकाउंट बनाकर बदनामी, अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी और सोशल मीडिया पर पीछा करना अब आम हथियार बन चुके हैं।